Thursday, 3 September 2015

(एक गोली चली … )

एक गोली चली इधरसे
एक गोली चली उधरसे,
एक माता रोयी इधरसे
एक माता रोयी उधरसे …

घायाल हुई थी सरहद
बेजुबान सी थी सरहद
रक्तरंजित मे सजी हुई
कब्रीस्थान लगी सरहद …
(एक गोली चली … )

शहीद हुआ था सरहद पे
बेटा, शोहर किसीका भाई
नफरत के इस जंग मे
जान वापस  किसीकी आयी ? …
(एक गोली चली … )

केसरी हरे नीले रंगोकी
पेहचान ये कैसे बताऊ
लाल रंग से था लतपत
किसका खून ,किसे दिखाऊ  …
 (एक गोली चली … )

बढी दूरिया सरहद से
ना दिलो मे बढी दूरिया
ईद दिवाली साथ मनाये
देखी रीश्तोमे  नजदीकिया
(एक गोली चली … )

- प्रवीण बाबूलाल हटकर

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