ऐ मालिक …
मुस्कुराते हुये पेड पौधे
बेहती नदिया गिरते झरने,
सीना ताण खडे चट्टाने और
गगन को छुते पर्वत दिवाने .
मुस्कुराते हुये पेड पौधे
बेहती नदिया गिरते झरने,
सीना ताण खडे चट्टाने और
गगन को छुते पर्वत दिवाने .
ऐ मालिक, ऐ मेरे खुदा
यहा हर सही चीज तुने बनाई ,
फिर क्यो इंसा बनाकर
हर ओ सुंदर चीज गीराई ,
यहा हर बरबादी का
कारण इंसा तू बना ,
कीस आधारपर तुझे
धरतीका मसीहा चुना .
मैने तो सुना था
इंसान गलतियोका पुतला है ,
हम इंसा को बनाकर ,
खुदा तू भी तो गलत निकला है…!
प्रवीण बाबूलाल हटकर
प्रवीण बाबूलाल हटकर
