ऐ जिंदगी तुझे क्या कहू …
गमो के बादलोसे
लीपटी हुई तस्वीर
या रेगीस्थान मे रेतसी
बिखरी हुई तकदीर …
ऐ जिंदगी तुझे क्या कहू …
झरनोसे गिरते फ़िसलते
बुन्दोके ख्वाबो की आशा
अपने आपमे सिमटीसी
कहू ब्रम्हांड की परिभाषा
ऐ जिंदगी तुझे क्या कहू …
ऐ जिंदगी तुझे क्या कहू …
-प्रवीण बाबूलाल हटकर
गमो के बादलोसे
लीपटी हुई तस्वीर
या रेगीस्थान मे रेतसी
बिखरी हुई तकदीर …
ऐ जिंदगी तुझे क्या कहू …
झरनोसे गिरते फ़िसलते
बुन्दोके ख्वाबो की आशा
अपने आपमे सिमटीसी
कहू ब्रम्हांड की परिभाषा
ऐ जिंदगी तुझे क्या कहू …
अपनीही राह पर
भटका हुआ मुसाफिर
या शब्दो के जालो को
सुलझाता हुआ कबीर
ऐ जिंदगी तुझे क्या कहू …
कब्रीस्थां के सन्नाटोसे
चीरती चीखती आवाज
या दलदलो के सिनेमे
गढे हुये रिती-रिवाज
ऐ जिंदगी तुझे क्या कहू …
गरगराते घुमघुमाते
साजीशोके बवंडर
या जन्म मृत्यू से रुबरु
परेशान सा सिकंदर …
-प्रवीण बाबूलाल हटकर

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