Friday, 11 December 2015

ऐ मालिक …

मुस्कुराते  हुये पेड पौधे
बेहती नदिया गिरते झरने,
सीना ताण खडे चट्टाने और
गगन को छुते पर्वत दिवाने .

ऐ मालिक, ऐ मेरे खुदा
 यहा हर सही चीज तुने बनाई ,
फिर क्यो इंसा बनाकर 
हर ओ सुंदर चीज  गीराई ,


यहा हर बरबादी का
कारण  इंसा तू बना ,
कीस आधारपर तुझे
धरतीका मसीहा चुना .


मैने तो सुना था 
इंसान गलतियोका पुतला है  ,
हम इंसा को बनाकर ,
खुदा तू भी तो गलत निकला  है…!

प्रवीण बाबूलाल हटकर 

No comments:

Post a Comment