Wednesday, 4 November 2015

ऐ खुदा मुझे मुआफ करना…

आसमा की उचाई,
समंदर की गेहराई,
दिवाली रोशणाई ,
गुंजती शेहनाई ,
कुबेर की दौलत ,
शेहन्शाह की शोहरत, 
फकीर की दुआ ,
वैद की दवा,
जिंदगी का जुआ ,
या मौत का कुआ, 
रेगीस्ता की रेत ,
बंजर जमी खेत ,
कब्रीस्ता की खामोश राते 
गुंगे के जबां पे लिपटी बाते,
ऐ खुदा मुझे मुआफ करना,
मुझे हर ओ चीज कम नजर आयी 
जभी मुझे वो गम मे नजर आयी … 
जभी मुझे वो गम मे  नजर आयी … 

-प्रवीण बाबुलाल हटकर 

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