Sunday, 13 August 2017

.. वक्त ...
वक्त से बांधी है
तेरी, मेरी डोर ।
चंद्रमा-चकोर
जैसे हम ।।


वक्त तो जाता है
यादो को छोड के ।
फिर ये मुडके
नही आता ।।


वक्त निरंतर
चलता रहता ।
न कभी रुकता
पलभर ।।


वक्त सिखलाता
अपने, गैरो की ।
अच्छे या बुरे की
पहचान ।।


ये वक्त की लाठी
चलना सिखाती ।
राह दिखलाती
गुरु जैसी ।।


वक्त की उंगली
थाम कर चलो ।
मंजिल को पालो
आसान से ।।

(अभंग ... )
- प्रवीण हटकर, अकोला

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