.. डर ...
लाख बुरा सोचो
डर डर जाये ।
सामने ना आये
सच्चाई के ।।
डर डर जाये ।
सामने ना आये
सच्चाई के ।।
डर से ना डरो
डर को भगाओ ।
पुत्र कहलाओ
चट्टानो के ।।
डर को भगाओ ।
पुत्र कहलाओ
चट्टानो के ।।
डर अंदरसे
पिघलाता हमे ।
दिखलाता हमे
कमजोर ।।
पिघलाता हमे ।
दिखलाता हमे
कमजोर ।।
प्रवीण बोल है
डर वहम है ।
झूठ छलावा है
फरेब सा ।।
डर वहम है ।
झूठ छलावा है
फरेब सा ।।
डर दिखता है
ये कब्रिस्ता जैसा ।
हा सन्नाटे जैसा
चेहरेपे ।।
ये कब्रिस्ता जैसा ।
हा सन्नाटे जैसा
चेहरेपे ।।
डर के सामने
कभी ना झुकना ।
निडर तू होना
अंत तक ।।
कभी ना झुकना ।
निडर तू होना
अंत तक ।।
डर पे विजय
बनाये निडर ।
कोसो दूर डर
भाग जाये ।।
बनाये निडर ।
कोसो दूर डर
भाग जाये ।।
(अभंग...)
- प्रवीण बाबूलाल हटकर
- प्रवीण बाबूलाल हटकर

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