चट्टानोसे पुछो
सब्र क्या होता है ।
उम्र क्या होती है
सेहने की ।।
धूप, छाव या हो
तुफान, सैलाब ।
मै खडा नवाब
की तरह ।।
तुफान, सैलाब ।
मै खडा नवाब
की तरह ।।
एक ही हौसला
डटे रहना है ।
खडे रहना है
निरंतर ।।
डटे रहना है ।
खडे रहना है
निरंतर ।।
कुछ अंदर है
उबला हुआ सा ।
लाव्हा पिघला सा
ज्वालामुखी ।।
उबला हुआ सा ।
लाव्हा पिघला सा
ज्वालामुखी ।।
बस फटने की
कतार पर है ।
फिर दबाये है
हौसलो से ।।
कतार पर है ।
फिर दबाये है
हौसलो से ।।
प्रवीण कहे रे
पक्के तुम बनो ।
चट्टानसा बनो
मजबूत ।।
पक्के तुम बनो ।
चट्टानसा बनो
मजबूत ।।
(अभंग ...)
- प्रवीण हटकर, अकोला
- प्रवीण हटकर, अकोला

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